छठवां वार्षिक 'राष्ट्रेतर तेलुगू समाख्या' सम्मेलन म बोलत श्री नायडू ह सुझाव दिस के तेलुगु भाषा के खातिर अउ हमर स्थानीय परंपरा के पुनरोद्धार के खातिर तेलुगु लोगन ल एक संग आना चाही। ये देखत के कोनो भाषा के उपेक्षा करे ले ओकर पतन शुरू हो जाही, उपराष्ट्रपति ह सलाह दीस के ये सबोच मनखे के कर्तव्य हावय के वो ह आन भाषा अउ संस्कृति ल कम करे बिना अपन मातृभाषा ल संरक्षित अउ बढ़ावा दें।
श्री नायडू ह राष्ट्रीय शिक्षा नीति, 2020 के परिकल्पना के मुताबिक प्राथमिक शिक्षा के अपन मातृभाषा म होए के जरूरत ल भी रेखांकित करिन। ओमन किहिन के अभी के बेरा म राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति, प्रधानमंत्री अउ भारत के मुख्य न्यायाधीश सहित देश के सर्वोच्च संवैधानिक पद म बइठे मनखे मन के प्राथमिक शिक्षा उंकर मातृभाषा म होए रिहिस। “लोगन ल ये गलत धारणा नइ बनानी चाही के यदि कोनो अपन मातृभाषा म पढ़ाई करत हावय त वो ह सफल नइ हो सकत अउ जीवन म आगू नइ बढ़ सके। येकर खंडन करे के खातिर हमर तिर अतीत अउ अभी के बेरा के कई उदाहरण हावयं।"
उपराष्ट्रपति ह तेलुगु साहित्य के आन भारतीय भाषा म अनुवाद करे के खातिर अउ जादा पहल करे के भी आह्वान करिन जेकर ले कोनो भी भाषा परंपरा के समृद्धि के प्रसार हो सके। ए तथ्य के सराहना करत के ए रकम ले के कई सांस्कृतिक संगठन मन ह वैश्विक महामारी के बखत तको अपन काम ऑनलाइन जारी रखे, श्री नायडू ह सुझाव दिस के भाषा अउ प्रौद्योगिकी ल उही भावना ले जोड़े (एकीकृत करे) के प्रयास तेज ले करे जाएं। ये देखत के तेलुगु भाषा के संरक्षण अउ प्रसार के खातिर तेलुगु भाषी राज्य के बाहिर एक हजार ले जादा संगठन कार्यरत हावयं, उपराष्ट्रपति ह 'राष्ट्रेतर तेलुगु समाख्या' नामक एक साझा मंच म एक संग आने के खातिर आयोजक मनके पहल के सराहना करिन। ओमन उंकर भविष्य के प्रयास के खातिर शुभकामना दिस।
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